रूस-यूक्रेन जंग:युद्ध के बाद परेशानियों का पहाड़, इसके बावजूद रूस छोड़ने को तैयार नहीं भारतीय

यूक्रेन पर रूस के हमले 160 दिन से जारी हैं। इस दौरान दुनियाभर के देशों का रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाना जारी है। अब रूस की गिनती ऐसे देश के रूप में हो गई है, जिस पर सबसे ज्यादा प्रतिबंध हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड ईरान के पास था। इन प्रतिबंधों ने न सिर्फ रूस को प्रभावित किया है, बल्कि यहां रह रहे भारतीयों पर भी गहरा असर पड़ा है।

तमाम दिक्कतों के बावजूद वह रूस छोड़ने के बारे में विचार नहीं कर रहे हैं। एप्पल समेत 500 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने रूस से कारोबार बंद कर दिया है। रूस में रह रहे लोग फोन बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, शिक्षा, बिजनेस, एंटरटेनमेंट जैसी सुविधाओं से कट चुके हैं।

OTT सब्सक्रिप्शन के लिए पेमेंट नहीं
मॉस्को स्थित मीडिया मैनेजर दत्तन नायर कहते हैं कि लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है। लोग यूट्यूब, नेटफ्लिक्स या क्लाउड स्टोरेज सब्सक्रिप्शन के लिए पेमेंट नहीं कर पा रहे हैं। फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म या अंग्रेजी की न्यूज वेबसाइट तक पहुंचने के लिए VPN सर्विस का इस्तेमाल करना पड़ता है, जो कि बहुत अस्थिर है। इसकी वजह है कि रूसी सरकार आए दिन सेवाओं को बंद कर देती है।

लोग काम करने के लिए जरूरी मीडिया प्लेटफॉर्म को भी सब्सक्राइब नहीं कर पा रहे हैं।
लोग काम करने के लिए जरूरी मीडिया प्लेटफॉर्म को भी सब्सक्राइब नहीं कर पा रहे हैं।

छात्र अपने अंतरराष्ट्रीय कार्ड यूज नहीं कर पा रहे
नायर बताते हैं कि हमारे बच्चे विदेश में रहते हैं, हम उन्हें पैसे नहीं भेज पा रहे हैं। हमने हाल ही में एक ऐसे मुद्दे का सामना किया है, जहां कोई भी कूरियर कंपनी भारत से रूस में कई मैग्जीन भेजने के लिए तैयार नहीं थी। अभिषेक मोहंती सेंट पीटर्सबर्ग यूनिवर्सिटी से PhD कर रहे हैं। वे इस बात से सहमत हैं कि भुगतान का मुद्दा सबसे अधिक परेशानी पैदा कर रहा है। रूस में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्र अब अपने अंतरराष्ट्रीय कार्ड का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

अभिषेक ने कहा कि सभी में एक अच्छी बात यह है कि कई छात्रों ने रूबल में भुगतान पाने के लिए काम करना शुरू कर दिया। मुझे मार्केटिंग में नौकरी मिल गई और यह मेरे लिए बहुत अच्छी बात है। मॉस्को में दिशा फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. रामेश्वर सिंह बताते हैं कि 2014 में भारत और रूस के बीच छोटे और मध्यम व्यवसायों को शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

जंग के बावजूद बच्चे घरों से बाहर खेलने निकल रहे हैं।
जंग के बावजूद बच्चे घरों से बाहर खेलने निकल रहे हैं।

व्यापार में दिक्कत
उन्होंने कहा कि कोरोना से उबर रही नई छोटी और मझौली कंपनियों को रूस और भारत में एक साथ ‌‌व्यापार करने में दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि कोई स्पष्ट पॉलिसी नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या युद्ध से रूस में भारतीय व्यावसाय बंद हो गए हैं, सिंह ने कहा कि ऐसे उद्योग हैं जिन्हें महामारी के दौरान काफी नुकसान हुआ है।

युद्ध पर राय देने से बच रहे भारतीय, युवा इस युद्ध के खिलाफ हैं
रूसी समाज युद्ध को लेकर बंटा हुआ है। अमूमन बच्चे ऑपरेशन का विरोध कर रहे हैं, जबकि माता-पिता इस युद्ध के पक्ष में हैं। भारतीय समुदाय अभी इस भावुक अंतरद्वंद्व से बचा हुआ है। नायर ने बताया कि अक्सर रूसी दोस्तों के साथ बहस हो जाती है, लेकिन अभी तक किसी ने हमसे संबंध नहीं तोड़े हैं। अभिषेक मोहंती बताते हैं कि मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े शहरों में लोगों में युद्ध के प्रति गहरा विरोध है,। लेकिन अरखान जेल्सक जैसे छोटे शहरों में सरकार के प्रति समर्थन ज्यादा है, जहां वो बीते तीन साल से रह रहे हैं।

भारतीय छात्र समुदाय भी एकजुट है, जबकि यूरोप और जापान से कई छात्रों को दूतावास ने देश छोड़कर जाने की हिदायत दी है। भारत के उन छात्र को जरूर समस्या हुई है, जो रूस में रिसर्च के लिए आए थे और उन्हें पश्चिमी देशों से फंड किया था। ये फंडिंग बंद है।

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